Fultoo Fukanda

A Doctor with a twisted, abstract and obscure sense of humor who'd rather trade his title of Dr. for that of a Musician..


आज दूर हो तुम….

आज दूर हो तुम,पर तुम्हे पाने को जी चाहता है..

फिर से घंटो तुम्हारी आखों में निहारने को जी चाहता है..

वो तुम्हारे छोटी छोटी इच्छाओ को पूरा करना,

वो साथ में बैठे दिन गुज़ार देना,

तुम्हे आज फिर से खुशी से नाचते हुए देखने का जी चाहता है..

वो घंटो तुम्हारी खिड़की की तरफ निहरना,

और बस एक झलक मिल जाने पर दिन भर वो पल याद करना,

आज फिर अकेले में मुस्कुराने को जी चाहता है..

वो छोटी बातों पर झगड़ना,

फिर भी एक दूसरे को चुपके देखने और मिलने क बहाना ढूंडना,

आज फिर तुम्हे मनाने का जी चाहता है..

समय बदल गया, हम बदल गये…

अब ना रही वो बातें,नही होती मुलाक़ातें,

नही दिखती तुम्हारे चेहरे पे मुकुराहट,नही सुनाई देती तुम्हारी आहट,

पर फिर भी तुम्हे गले लगाने को जी चाहता है

आज दूर हो तुम….

The Elusive G-Spot

With my tongue I explored
while attempting to memorize her reactions
My fingers followed the avid contour
exploiting her body’s gentle persuasions

My naughty words pleased her senses
extending the five to six
Boldness dismounted the neutral fence
Creative imagination became a randy mix

Five minutes slowly marched to forty-five
Each second seemed a lifetime
The sex was morally alive
Sensations just about blew my mind

We’re into the late morning
after a limping pause
The benefits were truly rewarding
We will revisit the act because…

The very short night quickly slipped
into eternities book of history
The lessons left me fully equipped
to find the elusive g-spot instinctively

एक पैगाम..

राह देखी थी इस दिन की काब्से,

आगे के सपने सज़ा रखे थे ना जाने कबसे.

बड़े उतावले थे जानेको,

ज़िंदगी का अगला पड़ाव पाने को.

पर ना जाने क्यू दिल आज भर आता है,वक़्त को पीछे ले जाने का जी चाहता है,

जिन बातो को लेकर रोते थे,

आज उनपे हसी आती है,

ना जाने क्यू आज उन पलो की याद बहुत सताती है.

कहा करता था बड़ी मुस्किल से 4साल सह गया,

पर आज लगता है कुछ पीछे रह गया,

कही-अनकही हज़ारो बाते रह गयी,

ना भूलने वाली कुछ यादें रह गयी,

मेरी टांग अब कौन खीचा करेगा,

सिर्फ़ मेरा सर खाने को कौन मेरा पीछा करेगा,

जहाँ 2000 का हिसाब नही वहाँ 2 रुपए के लिए कौन लड़ेगा,

कौन रात भर साथ पड़ेगा,

कौन मेरा टिफिन चुपके खाएगा,

कौन मेरे नये नये नाम बनाएगा,

मैं अब बिना मतलब किससे लडूँगा,

किससे बिना टॉपिक के बीसी करूँगा,

कौन मूह फेरने पे मनाएगा,

कौन नंबर आने पर गालिया सुनाएगा,

नीबू शरबत किसके साथ पीऊंगा,

वो हसी पल किसके साथ जीऊँगा,

ऐसे दोस्त कहाँ मिलेंगे जो खाई मे भी धक्का दे आए,

पर फिर बचाने खुद भी कूद जाए,

बर्नाउट किसके साथ खेलूँगा,

बोरिंग लेक्चर किसके साथ झेलूँगा,

मेरी बाते इग्नोर कौन करेगा,

मेरे मूह पे साची बात कहने की हिम्मत कौन करेगा,

दावत अब किसके साथ खाऊँगा  ,

रॅगिंग के क़िस्सो पे मूह किससे छुपौँगा,

विशाल पे बैठना ना जाने कब होगा,

कह दो दोस्तों यह सब होगा,

दोस्तों क लिए घर से कब लड़ पाएँगे,

क्या यह दिन फिर से आएँगे?

रात को 2 बजे पराठा खाने कौन जाएगा,

सबसे ज़्यादा लस्सी पीने की शरत कौन लगाएगा?

कौन मुझे मेरी क़ाबलियत पे भरोसा दिलाएगा,

और ज़्यादा उड़ने पर ज़मीन पे लाएगा,

मेरी खुशी मे सच मे खुश कौन होगा,

कौन दुख मे ज़्यादा दुखी होगा,

कौन इन बातों को सच में समझेगा,

बहुत कुछ कहना बाकी है,

कुछ साथ शायद बाकी है,

बस इस बात से दर लगता है दोस्तों,

हम अजनबी ना बन जाए दोस्तों,

ज़िंदगी में मिलने की फर्याद करते रहना,

अगर ना मिल पाएँगे तो याद करते रहना,

चाहे जितना हस्लो आज मुझपर,

मैं बुरा नही मानूँगा,

इस हसी को दिल में बसलूँगा,और जब याद आएगी तुम्हारी,यही हसी लेकर थोड़ा मुस्कुरा लूँगा…

यह था आउटलस क लिए एक छोटा सा पैगाम..

KYA KAREN -ALI

दिल को कहीं सुकून ना आये तो क्या करे,
तासीर किसी ग़म की रुलाये तो क्या करे.
रातों में तो ख़्वाबों में मुलाकात कर भी ले,
दिन को तुम्हारी याद सताए तो क्या करे.
हालात गरीबी के मेरे कुछ बुरे नही,
दौलत कोई ईमान को बनाए तो क्या करे.
फितरत में नही अश्क बहायें ,
मजबूरी ऐ हालात रुलाये तो क्या करे.
पहरों किसी के वास्ते रोता है दिल मेरा ,
आ कर कोई इस दिल से ना जाए तो क्या करे.
कहते हैं लोग भूलना सीखो मिया अली ,
हम चाह के भी भूल ना पाए तो क्या करे …
आरज़ू अरमानों की तमन्ना न रही,
एक ख्वाहिश बाकि है उम्मीद के चिराग से.
न करो जुस्तुजू किसी की दिल ओ जान से तुम,
मिलती है तकदीरे भी यहाँ इत्तेफाक से…



दिल ..

फिर कोई दर्द नया है दिल में

जाने क्या टूट गया है दिल में।

तेरा हसना तेरा गुमसुम रहना

तेरी हर एक अदा है दिल में।

मुस्कुराती हैं तुम्हारी यादें

अच्छा माहौळ बना है दिल में।

लोग मुझ से खफा हैं तो रहें

मैं ये कहता हूँ इज्ज़त है दिल में।

हर किसी से मैं भला कैसे कहूं

 क्या बात है,क्या है दिल में।

कल नादानी में एक खता कर बैठा

में अपने जीने की दुआ कर बैठा।